समस्तीपुर में ‘गौमांस’ के नाम पर हुई खलील की हत्या क्या है सच? | ग्राउंड रिपोर्ट

साल 2017 दिसंबर के महीने में राजस्थान में अफराज़ुल नाम के मज़दूर की हत्या की जाती है. हत्यारे शंभू लाल ने हत्या का वीडियो फेसबुक पर लाइव दिखाया. हत्या का मकसद ‘लव जिहाद’ को रोकना था. उस वीडियो में अफराज़ुल के साथ हुई बर्बर हिंसा को सभी ने फेसबुक पर देखा. लेकिन उस हत्या के बाद शंभू लाल के समर्थन में दक्षिणपंथ के विचारधारा के लोग खड़े हुए गए. उसके नाम पर जुलूस निकाले गए और यहां तक की उसे लोकसभा चुनाव 2019 में टिकट देने की भी बात हुई. उस हत्या के बाद भारत में एक मानसिकता बनी कि अगर किसी की हत्या जिहाद, गौरक्षा आदि कह कर की जाए तो उसके समर्थन में कई लोग खड़े हो जायेंगे. बिहार के भोजपुर में भी साल 2017 में गौ तस्करी के नाम पर 3 व्यक्तियों पर हमला किया गया था.

लेकिन साल 2022 में बिहार में ‘गौरक्षा’ का मामला फिर से चर्चा में है. वजह है समस्तीपुर में हुई एक हत्या. 16 फ़रवरी 2022 को समस्तीपुर के मुसरीघरारी में रहने वाले खलील को अगवा कर लिया जाता है. खलील जब काफ़ी देर तक घर वापस नहीं आते हैं तो खलील की पत्नी उन्हें कॉल करती हैं तो कोई व्यक्ति फ़ोन उठा कर कहता है-

“खलील अब वापस नहीं आएगा अगर ज़िन्दा देखना है तो 2 लाख 70 हज़ार रुपया दो.”

खलील के घर वालों ने इसकी शिकायत पुलिस से की और पुलिस ने किडनैपिंग का मामला दर्ज किया. उसके बाद 21 फ़रवरी को इन्स्टाग्राम सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अनुराग झा की आईडी से एक वीडियो पोस्ट किया जाता है जिसमें कुछ युवक खलील को पीटते हुए नज़र आ रहे हैं. इस वीडियो में खलील से गौमांस के बारे में बात की जा रही है. वीडियो में खलील से पूछा जा रहा है कि मुसरीघरारी में गौमांस कौन बनाता है और गौमांस कौन खाता है. इस वीडियो में कुछ युवक खलील को लगातार मारते हुए भी नज़र आ रहे हैं. इस वीडियो के सोशल मीडिया पर आने के बाद समस्तीपुर के मुसरीघरारी में सांप्रदायिक तनाव बना हुआ है.

(खलील के घर पर लोगों का जमावड़ा)

इस वीडियो के बाद पुलिस ने इलाके की दो बार छान-बीन की. दूसरी बार में पुलिस को खलील की लाश बरामद हुई. लाश को आधा जलाकर और एक पोल्ट्री फार्म के पास दफ़ना दिया गया था. खलील के कई अंग को काट भी दिया गया था.

पुलिस ने इस मामले में आरोपियों को गिरफ्तार किया है. लेकिन समस्तीपुर एस.पी. हृदयकांत ने इस हत्या को गौमांस से जुड़ा हुआ नहीं बताया है. उन्होंने बताया कि गाय का एंगल सिर्फ़ ध्यान भटकाने लाया गया है ताकि सांप्रदायिक रंग देकर आरोपी बच सकें. डेमोक्रेटिक चरखा की टीम जब ग्राउंड पर पहुंची और खलील के परिवार वालों से मुलाकात की. खलील के भाई सितारा डेमोक्रेटिक चरखा से बात करते हुए बताते हैं-

“हमको इंसाफ़ चाहिए. पुलिस हत्या की वजह गौमांस नहीं बता रही है. तो फिर ये वीडियो क्या है?”

खलील के पिता अपने बेटे के मौत के बाद से चुप हैं. उन्होंने हमारी टीम से बात करने से भी मना कर दिया.

उस गांव में रहने वाले और खलील के पड़ोसी लकी बताते हैं-

“पुलिस हमें घुमाने का काम कर रही है. जब से ये वीडियो सोशल मीडिया पर आया है उसके बाद से इस गांव के मुस्लिम समुदाय में डर है. लोगों को लग रहा है कि आज ये खलील के साथ हुआ है तो कल किसी और के साथ भी हो सकता है. इस पंचायत में लगभग 7 हज़ार की आबादी है जिसमें 1 हज़ार की आबादी मुसलमानों की है.”

डेमोक्रेटिक चरखा की टीम ने जब गांव के कई लोगों से बात की तो हत्या का एक और एंगल सामने आया. गांव के लोगों ने बताया कि खलील ने आरोपी युवकों से कुछ पैसे नौकरी लगाने के नाम पर लिए थे. लेकिन जब युवकों की नौकरी नहीं लगी तो उन्होंने ये कदम उठाया. समस्तीपुर सदर के डी.एस.पी हबीब फखरी ने जानकारी दी कि

मृतक मोहम्मद खलील रिजवी ने विपुल कुमार और उनके अन्य साथियों से नौकरी दिलाने के नाम पर 3 लाख 70 हजार रुपया लिए थे. बाद में रकम लौटाने के लिए कहा गया तो वे नहीं लौटा रहे थे. इसी को लेकर विपुल कुमार अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर मोहम्मद खलील रिजवी का अपहरण कर अपने मुर्गी फार्म ले गया. वहां उनके सिम को अपने मोबाइल में लगा कर नेता की पत्नी से 2 लाख 70 हजार रुपये खाते में डालने को कहा गया था. इस बीच विपुल कुमार और अन्य साथियों ने मोहम्मद खलील रिजवी के साथ मारपीट की जिससे उनकी मौत हो गई.

खलील के घर से थोड़ी दूरी पर ज़ाहिद नाम के व्यक्ति की दुकान है. ज़ाहिद बताते हैं-

“यहां पर कभी भी हिन्दू मुस्लिम तनाव नहीं हुआ है. रोड के इस तरफ़ मुसलमानों का घर है और उस तरफ़ हिन्दुओं का घर है. हमेशा हम दोनों समुदाय साथ मिलकर ही रहे हैं. लेकिन पहली बार इस वीडियो आने के बाद दोनों समुदायों में तनाव है. सब दुकानें शाम 7 बजे ही बंद हो जा रही हैं. इस वीडियो के सामने आने के बाद से इलाके पर काफ़ी बुरा असर पड़ा है.”

(अनुराग झा के द्वारा ये वीडियो इन्स्टाग्राम पर पोस्ट किया गया था)

इस हत्या पर जहां मेनस्ट्रीम मीडिया ने चुप्पी साधी हुई है वहीं सत्ता पक्ष भी खुल कर इस मामले पर नहीं बोल रहा है. खलील का जुड़ाव सत्तादल JDU से था और वो शिक्षा मंत्री विजय चौधरी के करीबी भी थे.

इस हत्या का मकसद सिर्फ़ गौमांस है ये पुलिस की जांच से बेहतर पता चलेगा. लेकिन इस हत्या का ताल्लुक पैसों की लेन-देन से भी है. देश में लगातार चल रहे सांप्रदायिक तनाव को समस्तीपुर में भी लागू करने की कोशिश की गयी है. जिस तरह से शंभू लाल के समर्थन में कई दक्षिणपंथी संगठन थे उसी को खलील की हत्या में भी भुनाने की कोशिश हुई है. इस वजह से पहली बार मुसरीघरारी में सांप्रदायिक तनाव है.

First published in Democratic Charkha

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